सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगी पाबंदी को हटाने से इनकार किया

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बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण पर पड़ने वाले असर को जांचने के लिए एक नवंबर तक पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी थी
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पटाखों की बिक्री पर पाबंदी से परेशान पटाखा व्यापारियों को कोई राहत नहीं मिल पाई है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने नौ अक्टूबर के अपने आदेश में बदलाव करने से इनकार करते हुए पटाखा व्यापारियों की याचिका खारिज कर दी. अदालत ने इससे वायु प्रदूषण पर पड़ने वाले असर का आकलन करने की बात एक बार फिर दोहराई है. बीते सोमवार को शीर्ष अदालत ने एक नवंबर तक दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी थी.
पटाखा व्यापारियों ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका में लगाई थी. इसमें सुप्रीम कोर्ट के सितंबर के आदेश का हवाला देते हुए व्यापारियों ने कहा था कि उन्होंने दिवाली को ध्यान में रखकर पटाखों का काफी स्टॉक जमा कर लिया है, जिससे नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसी साल 12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर पूर्ण पाबंदी को ‘अतिवादी’ कदम बताया था और इसे आंशिक तौर पर हटा लिया था. इसके अलावा पुलिस को दिवाली और दशहरे से पहले अधिकतम 500 दुकानदारों को अस्थायी लाइसेंस जारी करने का भी निर्देश दिया था.
उधर, दिवाली के मौके पर दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या के पीछे केवल पटाखों को वजह नहीं माना जाता है. जैसा कि कर्नाटक के शिवकाशी स्थित पटाखा बनाने वाली सबसे पुरानी कंपनी अय्यन फायरवर्क्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अबिरुबन गृहदुरई का कहना है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने पहले के अपने तमाम फैसलों में पटाखों को प्रदूषण की वजह नहीं माना है. आईआईटी कानपुर और नासा की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दिवाली के आसपास दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण स्तर बढ़ने की वजह फसलों के अवशेषों को जलाया जाना है, क्योंकि पाकिस्तान के रावलपिंडी और अन्य जगहों पर भी यही हाल होता है. पटाखों की बिक्री पर पाबंदी को हिंदू आस्था के खिलाफ बताते हुए अबिरुबन गृह दुरई ने कहा कि इससे पटाखा उद्योग को 30 फीसदी तक का नुकसान उठाना पड़ेगा.

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