राममंदिर बनने से पहले VHP और निर्मोही अखाड़े में खींचतान, राम के नाम पर VHP खा गया 1400 करोड़

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राममंदिर निर्माण को लेकर अब नया खुलासा सामने आया है। राममंदिर मामलें में 3 पक्षधरों मे से एक पक्षधर निर्मोही अखाड़े का कहना है कि विश्व हिन्दू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए घोटाला किया है।
निर्मोही अखाड़े के प्रवक्ता ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद वालों ने मिलकर राम मंदिर के नाम 1400 करोड़ रुपया खा गए है।
उन्होंने कहा कि हम लोग राम जी के पुत्र हैं, सेवक हैं, हमें पैसे की पेशकश नहीं हुई कभी भी। पैसे खाकर बैठे हैं नेता लोग। इसके बाद सीताराम ने बिल्कुल साफ कहा कि विश्व हिन्दू परिषद ने घर-घर घूम कर एक-एक ईंट मांगी, पैसा जमा किया और फिर इस पैसे को खा गए।




संत सीताराम ने खुलासा करते हुए बताया कि ये जितने भी फर्जी बातें चल रही है ये मुसलमानों को मजबूत करने के लिए हो रही है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए बाबरी मस्जिद पर बोलते हुए कहा की रामलला वहीं रहेंगे ना कि मस्जिद रहेगी। 1935 से निर्मोही अखाड़ा वहां पूजा पाठ करता आया है।
उन्होंने विश्व हिन्दू परिषद पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ नेता लोग पैसे खाकर बैठ गए है। यहां तक घर घर जाकर मंदिर के लिए जो ईंट मांगी पैसे जमा किये उसके बाद उस पैसे को खा गए।
मुख्यमंत्री योगी का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसी पैसे से प्रदेश में सरकार बनी फिर अब योगी से पीछे हट गए है। यहां तक की योगी जी ने साफ़ कह दिया है हमारी ओर से कोई पहल नहीं है। इसका जवाब उन्हें देना होगा जिन्होंने मंदिर के नाम पर सरकार बनाई है।
आरोप लगते ही विश्व हिन्दू परिषद के नेता विनोद बंसल सामने आये और कहा कि क्योकिं हम लोग परिषद् 1964 से आस्तित्व में आया है और उसके बाद से हर साल पैसे का हिसाब भी होता है ऐसे में हम कह सकते है परिषद ने एक पैसा नहीं लिया है और हमे इसकी जानकारी भी नहीं है किसने कितने पैसे खाए है।
गौरतलब है कि निर्मोही अखाड़ा अयोध्या मामलें में 1959 में चर्चा में आया था, जब अदालत में विवादित ढांचे के संदर्भ में वाद प्रारम्भ किया। उसने विवादित भूमि पर स्वामित्व का दावा करते हुए कहा कि अदालत द्वारा नियुक्त रिसीवर हटाया जाए। उसने खुद को उस स्थल का संरक्षक बताया था जहां माना जाता है कि भगवान राम का जन्म हुआ था।
जिसके बाद साल 2010, 30 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आया। जिसमें विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटा गया। जिसमे से एक हिस्सा एक तिहाई जमीन निर्मोही अखाड़ा को, दूसरा जहां रामलला विराजमान हैं और आसपास की जमीन राम मंदिर को। एक तिहाई सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया था। इस फैसले के बाद ये सुप्रीम कोर्ट अपील किया है अभी इस पर फैसले आना बाकी है।

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