अयोध्या में नहीं बनेगा राम मंदिर, जानें- क्या प्रस्ताव हुआ पास?

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अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित स्थल पर मानवता भवन बनाने की योजना पर राजधानी में कई प्रस्ताव पारित किए गए। पुणे स्थित शिक्षाविद् डॉ. विश्वनाथ कराड़ की अध्यक्षता में गाँधी जयंती के मौके पर धार्मिक नेताओं, शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों के एक समागम में प्रस्ताव किया गया कि अयोध्या में सभी धर्मों के पूजा स्थल बनाए जाएँ।

दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में पुणे के विश्व शांति विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ विश्वनाथ कराड़ की अगुवाई में राम जन्मभूमि न्यास के राम विलास वेदांति, पूर्व सांसद आरिफ मोहम्मद खान, शिक्षाविद् डा. विजय भटकर, स्वामी अग्निवेश, शिया धर्म गुरू कल्बे रुशैद रिज़वी और पत्रकार वेदप्रताप वैदिक समेत कई लोग जमा हुए और दिन भर मंथन के बाद एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसके मुताबिक़ प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 27 सदस्यीय संचालन समिति बनाने की अपील की गई जो इस जटिल मुद्दे पर जल्द से जल्द कोई रास्ता निकालेगी।

हिन्दू, इस्लाम, बौद्ध, इसाई, सिख, जैन, यहूदी की आराधना एवं पूजा स्थल के रूप में विश्वधर्मी श्रीराम मानवता भवन के निर्माण के लिए अयोध्या की 2.77 एकड़ की विवादित भूमि के पास सरकार द्वारा अधिग्रहित 67 एकड़ भूमि को भी भारत सरकार द्वारा मानवता भवन के लिए रिलीज़ करने की अपील की गई। इस सम्मेलन में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि एक राष्ट्रीय न्यास के जरिए मानवता भवन बनाया जाए। इस न्यास में सरकार के सदस्य, विज्ञान, धर्म और दर्शन के प्रतिनिधि तथा भारत के विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि तथा न्याय एवं कानून, मानव विज्ञान एवं समाज विज्ञान के क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां शामिल हों। यहाँ प्रस्ताव में यह भी अपील की गई कि न्यास का नेतृत्व भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश राज्य सरकार की ओर से नामजद मुख्य न्यासी करें।

दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में पुणे की एमआईटी यूनिवर्सिटी की तरफ से ‘‘सर्वधम संवाद के जरिए अयोध्या स्थित रामजन्म भूमि मंदिर-बाबरी मजिस्द विवाद का सर्वसम्मत समाधान निकालने की आवश्यकता’’ विषय पर आयोजित गोलमेज़ कॉन्फ्रेन्स में यह प्रस्ताव रखा गया कि 27 सदस्यीय समिति में सरकार, विज्ञान, धर्म और दर्शन से जुड़े लोग, भारत के विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि, न्याय एवं कानून, कला और संस्कृति, मानवता एवं सामाजिक विज्ञान से जुड़े लोग शामिल हों।

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अयोध्या मसले पर गोलमेज सम्मेलन में संबोधित करते हुए एमआईटी यूनिवर्सिटी के संस्थापक प्रो डॉ विश्वनाथ कराड। साथ हैं स्वामी अग्निवेश, पूर्व सांसद आरिफ़ मुहम्मद ख़ाँ, राम जन्मभूमि न्यास के राम विलास वेदांति, एमआईटी विश्व शांति विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ विश्वनाथ कराड और शिक्षाविद् विजय भटकर

बाबरी मस्जिद के विवादित अहाते समेत भारत सरकार द्वारा अधिग्रहीत की गई कुल 69.77 एकड़ भूमि पर सभी धर्मों के स्थल भी विकसित किए जाएँ। इसका एक मॉडल कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में प्रदर्शित किया गया। प्रस्ताव में कहा गया है कि मौजूदा समय में माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा तीन भागों में बांटी गई 2.77 एकड़ की जमीन पर सिर्फ मंदिर बने और बाकी अहाते की 67 एकड़ भूमि को सुन्दर धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जाए जिसमें मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च, सिनेगॉग, जैन मंदिर, बौद्ध स्तूप और अन्य धर्मों के स्थल हों।

एमआईटी विश्व शांति विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष और यूनेस्को की एक पीठ के अध्यक्ष डा. विश्वनाथ डी कराड ने कहा, ‘‘से संबद्ध हम पूरी गंभीरता से महसूस करते हैं कि मातृभूमि भारत के व्यापक हितों की रक्षा के लिए तथा देश के दो प्रमुख समुदायों – हिन्दुओं तथा मुसलमानों के बीच संभावित नफरत, बैर भाव, हिंसा तथा संदेह के वातावरण को कम करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक और अनिवार्य है कि हम अयोध्या में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद के जटिल, लंबे समय से लंबित टकराव के समाधान के लिए गंभीर तथा लगातार प्रयास करें।’’ उन्होंने कहा ‘‘विष्वधर्मी श्री राम मानवता मंदिर ज्ञान, विवके, समर्पण, आस्था, बलिदान तथा मानव सेवा की हमारी गौरवपूर्ण परम्पराओं को परिलक्षित करने की दिषा में एक सही कदम होगा जिन्हें हमारे धर्मों ने हमेशा आगे बढ़ाया है।’’

दिल्ली घोषणा पत्र में कहा गया है कि रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद केवल 2.77 एकड़ विवादित जमीन को लेकर है जिसे राम लला का जन्म स्थान बताया जाता है और जिसे माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से इस समय तीन कानूनी पक्षकारों – राम लला का प्रतिनिधित्व करने वाले अखिल भारतीय हिन्दू महासभा, निर्मोही अखाड़ा और अखिल भारतीय सुन्नी वक्फ बोर्ड को आवंटित किया गया है। हर पक्ष को विवादित भूमि का केवल 0.9 एकड़ हिस्सा मिलेगा। सभा ने कहाकि वह यह गंभीरता से महसूस करते हैं कि 0.9 एकड़ क्षेत्र वाला भूमि का टुकड़ा न तो राम लला का मंदिर बनाने के लिए और न ही मस्जिद बनाने के लिए पर्याप्त है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार किसी विवादित जमीन या स्थान पर कोई मस्जिद या पूजा स्थल का निर्माण नहीं हो सकता है। हिन्दू मान्यता के अनुसार भगवान श्री राम का मंदिर राम लला के जन्म स्थल या रामजन्म भूमि की उसी जगह पर निर्मित होना चाहिए।

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